केशव साहू कसडोल। प्रेम और सौहाद्र का महापर्व होलिका दहन हर वर्ष फागुन मास के पूर्णिमा के दिन मनाई जाती हैं। मान्यता अनुसार होलिका दहन प्रहलाद और होलिका को लेकर है, जिसे अग्नि में जलाकर मारने का प्रयास किया जाता है, परंतु भगवान श्रीहरि कृपा से बच जाते यह होलिका दहन का एक प्रसिद्ध कहनी है।नगाड़े की थाप और फाग गीतों के साथ गांव के बैगा द्वारा होलिका दहन किया है, होलिका दहन करने के लिए ग्रामीण अपने घरों से कंडा और लकड़ी लेकर जाते है, और होलिका में जले राख को शरीर लेपते है।

कटगी क्षेत्र में इसबार गायत्री परिवार के आह्वान पर पुरुषों के साथ महिलाए भी होलिका दहन करने गई, पूजा अर्चना सुख समृद्धि की कामना करते हुए सभी गिले शिकवे भुलाकर एक दूसरे पर रंग गुलाल लगाकर बधाई देते हुए शांतिपूर्ण तरीके से आर्दश होली खेली गई।

युवा वर्ग आदर्श आचार सहिता का पालन करते हुए होलियाना मुड़ में रंग गुलाल लगाकर एक दूसरे को बधाई शुभकामनाए देते दिखाई दिए। नगाड़े, मृदंग की थाप में होली गीत गाते हुए होली खेलने वालों की टोली चल रहीं थी, सभी गिले शिकवे भुलाकर एक दुसरे पर रंग लगाया जा रहा था, छोटे छोटे बचे भी कहा पीछे हटने वाले थे, सभी चौक चौराहों में पिचकारी एव रंग भरे बलून लेकर होली खेलने में मशगूल दिखाई दिए, सभी वर्ग शांति प्रिय होली खेलने के अपने अपने घरों में बने व्यंजनों आनंद उठाया। अप्रिय घटनाओं को रोकने के पुलिस टीम द्वारा लगातार पेट्रोलिंग किया जा रहा था।